हनुमान जी के पुत्र का नाम और बच्चों के लिए मकरध्वज की कहानी
लंका दहन की कहानी अभी खत्म ही हुई थी। आपका छह साल का बेटा कुछ देर चुप रहा, फिर उसने वह सवाल पूछ लिया जिसके लिए आप तैयार नहीं थे। "मम्मा, क्या हनुमान जी का भी कोई बेटा था?"
हाँ, एक तरह से था। हनुमान जी के पुत्र का नाम मकरध्वज है, और उनकी कहानी रामायण की परंपरा की सबसे अनोखी और प्यारी कहानियों में से एक है। इसमें एक बड़ी मछली है, धरती के नीचे बसा एक राज्य है, एक दरवाज़े पर हुई लड़ाई है, और एक पिता है जो अपने बेटे से मिलता है पर उसे पहचानता नहीं। बच्चे यह कहानी सालों तक याद रखते हैं। नीचे पूरी कहानी है, और उन सवालों के जवाब भी जो बच्चे इसके बाद ज़रूर पूछते हैं।
हनुमान जी के पुत्र का नाम मकरध्वज है, छोटा सा जवाब पहले
हनुमान जी के बेटे का नाम मकरध्वज है। उनका जन्म हनुमान जी के पसीने की एक बूँद से हुआ, जो समुद्र में गिरी और जिसे मकर नाम के एक विशाल जलजीव ने निगल लिया। मकरध्वज पाताल लोक में बड़े हुए और वहाँ के राजमहल के द्वारपाल बने।
नाम में ही कहानी छिपी है। "मकर" वह समुद्री जीव है जिसे अक्सर आधा मगरमच्छ और आधा मछली जैसा दिखाया जाता है। "ध्वज" का मतलब है झंडा या पताका। यानी मकरध्वज का अर्थ है "जिसके झंडे पर मकर हो", और यह नाम चुपचाप याद दिलाता है कि उनका जन्म कहाँ से हुआ।
पाँच साल के बच्चे के लिए इतना जवाब काफ़ी है। बड़े बच्चों के लिए असली सीख पूरी कहानी में है।
समुद्र में गिरी पसीने की एक बूँद कैसे बनी हनुमान जी का बेटा

कहानी शुरू होती है रामायण की सबसे मशहूर आग के ठीक बाद। रावण के सैनिकों ने हनुमान जी की पूँछ पर तेल में भीगा कपड़ा लपेटकर आग लगा दी थी। हनुमान जी ने उसी सज़ा को अपनी ताकत बना लिया और एक छत से दूसरी छत पर कूदते हुए सोने की लंका जला दी। यह हिस्सा आप हमारी लंका दहन की कहानी में पढ़ सकते हैं।
लंका जलाने के बाद हनुमान जी अपनी पूँछ की आग बुझाने और शरीर को ठंडा करने समुद्र के पास गए। इतनी मेहनत के बाद उनका शरीर तप रहा था और वे बहुत थक गए थे। उनके शरीर से पसीने की एक बूँद समुद्र में गिरी। नीचे तैर रहे एक बड़े मकर ने वह बूँद निगल ली, और उसी बूँद से एक बालक का जन्म हुआ। वह वानर जैसा दिखता था, अपने पिता जैसा बलवान था, और उसके शरीर में समुद्र का थोड़ा सा अंश भी था।
हनुमान जी सीता माता की खबर लेकर राम जी के पास लौट गए। उन्हें पता ही नहीं था कि गहरे समुद्र के नीचे कहीं उनका एक बेटा भी है।
4 से 6 साल के बच्चे को ऐसे सुनाएँ: "हनुमान जी ने इतनी मेहनत की कि उन्हें बहुत गर्मी लगने लगी। ठंडा होने के लिए वे समुद्र में कूद गए। उनके पसीने की एक बूँद पानी में गिरी और एक बड़ी मछली ने उसे निगल लिया। पता है उस छोटी सी बूँद से क्या हुआ? एक प्यारा सा बेटा पैदा हुआ, जो अपने पापा जैसा ही ताकतवर था।"
जिस रात अहिरावण राम जी और लक्ष्मण जी को पाताल लोक उठा ले गया
मकरध्वज पाताल लोक में बड़े हुए, जहाँ अहिरावण नाम का एक मायावी राजा राज करता था। कुछ कहानियों में उसे महिरावण भी कहते हैं। कुछ कहानियों में अहिरावण रावण का भाई है, कुछ में उसका बेटा, पर हर कहानी में वह रावण का साथी है। उसने इस युवा योद्धा को अपने महल के दरवाज़े का पहरेदार बना दिया, और मकरध्वज ने यह ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। उनकी मर्ज़ी के बिना कोई अंदर नहीं जा सकता था।
युद्ध में रावण हारने लगा तो उसने अहिरावण से मदद माँगी। उस रात राम जी और लक्ष्मण जी शिविर में सो रहे थे, और पहरे पर खुद हनुमान जी थे। फिर भी अहिरावण अपनी माया से चुपचाप अंदर आया, दोनों भाइयों को गहरी नींद में सुलाया और उन्हें पाताल लोक उठा ले गया। उसकी योजना थी कि वह दोनों की बलि अपनी देवी को चढ़ाएगा।
सुबह शिविर में सबने देखा कि राम जी और लक्ष्मण जी वहाँ नहीं हैं। विभीषण जी तुरंत समझ गए कि यह किसका काम है। अब केवल हनुमान जी ही पाताल जाकर उन्हें वापस ला सकते थे।
पाताल के दरवाज़े पर जब हनुमान जी अपने बेटे से मिले
हनुमान जी अहिरावण के महल के दरवाज़े पर पहुँचे तो एक युवा योद्धा ने उनका रास्ता रोक लिया। वह काफ़ी हद तक हनुमान जी जैसा ही दिखता था। हनुमान जी ने उसे हटने को कहा, पर पहरेदार नहीं माना।
उसने कहा, "मेरे स्वामी की आज्ञा के बिना कोई अंदर नहीं जाएगा। मैं मकरध्वज हूँ, महाबली हनुमान का पुत्र।"
हनुमान जी हैरान रह गए। जहाँ तक उन्हें पता था, उनका कोई बेटा था ही नहीं। तब मकरध्वज ने पसीने की बूँद और मकर वाली पूरी बात बताई। धीरे-धीरे हनुमान जी समझ गए कि यह सच में उनका बेटा है।
अब आता है वह हिस्सा जो बच्चे कभी नहीं भूलते। एक-दूसरे को पहचानने के बाद भी मकरध्वज ने दरवाज़ा नहीं खोला। उन्होंने दरवाज़े की रक्षा का वचन दिया था, और हनुमान जी का बेटा होने से उनका कर्तव्य नहीं बदला।
इसलिए पिता और पुत्र में युद्ध हुआ। हनुमान जी ज़्यादा बलवान थे, पर उन्होंने बेटे को चोट नहीं पहुँचाई। उन्होंने अपनी पूँछ से मकरध्वज को बाँध दिया और अंदर चले गए।
आगे की कहानी अपने आप में एक अलग कथा है। अहिरावण के प्राण पाँच दिशाओं में जल रहे पाँच दीयों से जुड़े थे, और पाँचों को एक साथ बुझाना ज़रूरी था। इसके लिए हनुमान जी ने पाँच मुख धारण किए, और यहीं से पंचमुखी हनुमान की कहानी आती है। अहिरावण मारा गया और राम जी व लक्ष्मण जी आज़ाद हो गए।
लौटते समय हनुमान जी दरवाज़े पर रुके और अपने बेटे के बंधन खोल दिए। राम जी ने पूछा कि यह युवा पहरेदार कौन है। पूरी बात सुनकर राम जी ने मकरध्वज को पाताल लोक का नया राजा बना दिया। (कुछ कहानियों में उन्हें राजा हनुमान जी बनाते हैं।) जिस बेटे ने अपने कर्तव्य के लिए पिता से भी युद्ध किया, उसे उसी ईमानदारी के लिए एक राज्य मिला।
हनुमान जी तो ब्रह्मचारी थे, फिर बेटा कैसे, बच्चों को ऐसे समझाएँ
जो बच्चे हनुमान जी के बारे में पहले से थोड़ा जानते हैं, वे अगला सवाल तुरंत पूछते हैं। "पर हनुमान जी ने तो शादी नहीं की थी, फिर उनका बेटा कैसे हुआ?"
यह समझदारी भरा सवाल है, और इसका जवाब कहानी में ही है। हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं, यानी उन्होंने जीवन भर विवाह नहीं किया और पूरा जीवन प्रभु राम की भक्ति में लगाया। मकरध्वज का जन्म पसीने की बूँद और एक समुद्री जीव से हुआ, इसलिए हनुमान जी का यह व्रत कभी नहीं टूटा। न विवाह हुआ, न पत्नी थी, न कोई वचन टूटा। कहानी ने हनुमान जी को बेटा भी दिया और उनका स्वभाव भी वैसा ही रहने दिया।
7 या 8 साल के बच्चे को आप इस तरह बता सकते हैं: "हनुमान जी ने कभी शादी नहीं की। मकरध्वज हनुमान जी की मेहनत से पैदा हुए, शादी से नहीं। इसीलिए वे एक बहुत खास बेटे हैं।"
अगर आपका बच्चा हनुमान जी के अपने माता-पिता, अंजना माता और केसरी जी, और वायु देव के बारे में जानना चाहे, तो हनुमान जी के माता-पिता और पूरे परिवार की कहानी में सब विस्तार से है। हनुमान जी के दूसरे नाम और उनके अर्थ जानने के लिए हनुमान जी के 12 नाम और उनके अर्थ भी पढ़ सकते हैं।
मकरध्वज की कहानी कहाँ से आती है
जो माता-पिता हनुमान जी के पुत्र का नाम खोजते हैं, वे अक्सर यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह कहानी "सच में रामायण में है"। इसका सच्चा जवाब बच्चों के भी काम आता है।
मकरध्वज का ज़िक्र न वाल्मीकि रामायण में है और न ही तुलसीदास जी के रामचरितमानस में। अहिरावण वाला प्रसंग बाद की क्षेत्रीय रामायणों में मिलता है, जैसे बांग्ला की कृत्तिवासी रामायण। उस प्रसंग में हनुमान पुत्र मकरध्वज का हिस्सा ज़्यादातर बंगाल, ओडिशा, गुजरात और दक्षिण भारत की लोक कथाओं में सुनाया जाता है। सैकड़ों सालों में जब रामायण हर भाषा में सुनाई गई, तब ये कहानियाँ जुड़ती गईं।
इसीलिए अलग-अलग कहानियों में छोटी बातें बदल जाती हैं। कहीं अहिरावण को महिरावण कहा गया है। कहीं पसीने की बूँद तब गिरती है जब हनुमान जी आग के बाद स्नान कर रहे होते हैं। पर हर रूप में कहानी की मूल बात एक ही रहती है: एक बेटा जो अपना वचन निभाता है, और एक पिता जो इसके लिए उसका सम्मान करता है।
भक्त आज भी गुजरात में बेट द्वारका के हनुमान दांडी मंदिर जाते हैं। माना जाता है कि यहीं हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले थे। यहाँ पिता और पुत्र दोनों की पूजा एक साथ होती है, जो भारत के गिने-चुने मंदिरों में ही देखने को मिलता है।
6 साल और 10 साल के बच्चे इस कहानी से क्या सीखते हैं

मकरध्वज की कहानी हर उम्र के बच्चे को अलग तरह से छूती है।
4 से 6 साल: इन्हें कहानी का जादू अच्छा लगता है। पसीने की बूँद, बड़ी मछली, छोटा सा बेटा। जन्म और दरवाज़े पर मुलाकात वाला हिस्सा सुनाइए और वहीं रुक जाइए। फिर उनसे मकर का चित्र बनवाइए।
7 से 9 साल: ये बच्चे लड़ाई वाली बात पर ध्यान देते हैं। उनसे पूछिए, "मकरध्वज ने अपने पापा को अंदर क्यों नहीं जाने दिया?" ज़्यादातर बच्चे कहेंगे कि जाने देना चाहिए था। फिर पूछिए कि अगर हर पहरेदार अपने घरवालों के लिए दरवाज़ा खोल दे तो क्या होगा। जवाब बच्चे अक्सर खुद ही ढूँढ लेते हैं।
10 से 12 साल: ये बड़ी बात समझने के लिए तैयार हैं। मकरध्वज एक बुरे राजा की सेवा कर रहे थे, फिर भी उन्होंने अपना वचन निभाया। हनुमान जी ने उन्हें वफ़ादारी की सज़ा नहीं दी, बल्कि उनका सम्मान किया। बड़े बच्चों से बात कीजिए कि अपना कर्तव्य निभाना और सही पक्ष चुनना हमेशा एक ही बात नहीं होती, और दोनों क्यों ज़रूरी हैं।
इस कहानी के साथ बच्चों के लिए हनुमान जी की 5 कहानियाँ भी सुनाइए। इससे बच्चा हनुमान जी का पूरा सफ़र जान लेगा, उस नन्हे बालक से जिसने सूरज को फल समझकर निगलना चाहा, उस पिता तक जो पाताल के दरवाज़े पर अपने बेटे से मिले।
जब आपका बच्चा रोज़ हनुमान जी से मिलने के लिए तैयार हो, तो तपस्वे की बच्चों के लिए सचित्र हनुमान चालीसा 40 चौपाइयों को रंगीन चित्रों और सरल अर्थों के साथ समझाती है, 3 से 12 साल के बच्चों के लिए। साथ में आप हनुमान चालीसा हिंदी PDF भी मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं। मकरध्वज की कहानी जानने वाले बच्चे अक्सर हर पन्ने पर बजरंगबली की ताकत और दया को पहचान लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
हनुमान जी के पुत्र का नाम क्या है?
हनुमान जी के पुत्र का नाम मकरध्वज है। उनका जन्म हनुमान जी के पसीने की बूँद से हुआ, जिसे समुद्र में एक मकर ने निगल लिया था। वे पाताल लोक के द्वारपाल बने।
हनुमान जी ब्रह्मचारी थे, तो उनका बेटा कैसे हुआ?
लंका जलाने के बाद हनुमान जी ने समुद्र में शरीर ठंडा किया, तब उनके पसीने की एक बूँद मकर ने निगल ली। मकरध्वज का जन्म उसी बूँद से हुआ, विवाह से नहीं, इसलिए उनका ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।
क्या मकरध्वज का ज़िक्र रामायण में है?
मकरध्वज का ज़िक्र न वाल्मीकि रामायण में है, न तुलसीदास जी के रामचरितमानस में। वे पाताल लोक के अहिरावण प्रसंग का हिस्सा हैं, जो बाद की क्षेत्रीय रामायणों, जैसे कृत्तिवासी रामायण, और लोक कथाओं में मिलता है।
हनुमान जी से मिलने के बाद मकरध्वज का क्या हुआ?
अहिरावण को हराकर और राम जी व लक्ष्मण जी को छुड़ाकर हनुमान जी ने बेटे के बंधन खोल दिए। ज़्यादातर कहानियों में राम जी ने पूरी बात सुनकर, वचन निभाने के लिए मकरध्वज को पाताल लोक का राजा बना दिया।
क्या मकरध्वज का कोई मंदिर है?
कई मंदिर हैं। सबसे प्रसिद्ध है गुजरात में बेट द्वारका का हनुमान दांडी मंदिर, जहाँ माना जाता है कि हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले थे। यहाँ पिता और पुत्र की पूजा एक साथ होती है।
